Penter Ne Meri Chut Ko Rang Diya-4
Penter Ne Meri Chut Ko Rang Diya-4

               Penter Ne Meri Chut Ko Rang Diya-1

मैंने दरवाजा बंद किया.
मेरे पति ने झट से मेरा गाउन निकाल लिया, मेरी पेंटी को निकाल दिया और खुद अपने सारे कपड़े उतार कर, अपना लंड मेरे मुँह के पास लाया, मुझे उनका गोरा लंड अब छोटा और पतला लगने लगा, मेरा मन अब पति और पेंटर के लंड की तुलना करने लगा था, मेरे पति का गोरा पतला और छोटा था तो पेंटर का काला लंबा और मोटा था.

‘क्या देख रही हो लंड की तरफ?’ पति ने पूछा.
कुछ जवाब देने के बजाय मैं उसका लंड चूसने और चाटने लगी, उसको शक ना हो इसलिए दुगने जोश में उसका लंड चूसने लगी.
‘हाऽऽई सीमा डार्लिंग, आज क्या कमाल चूस रही हो तुम!’ पति खुश होकर बोला.

बैडरूम के की-होल से पेंटर हमें देख रहा था और हमारी बातें सुन रहा था.
‘धीरे से चूसो, नहीं तो मेरा हो जायेगा.’
मुझे भी यही चाहिए था पर मैं रुक गई, उनके लंड पर कंडोम चढ़ाया और खुद पीठ के बल लेट गई- जल्दी डालो!
मैंने जानबूझ कर ‘मुझे जल्दी है’ ऐसा दिखाया.

उसने अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया.
‘आज तो एकदम से चला गया लंड चूत में?’ उसने आश्चर्य से कहा.

मैंने मन में बोला ‘जायेगा नहीं तो क्या… कितना बड़ा लंड लिया है मेरी चूत ने!’

उसके धक्कों से मेरी चूत का दर्द और बढ़ने लगा पर सहन करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था.
‘जोर से करो ना जानू!’ मैंने उसे प्यार से कहा तो वो मुझे जोर से धक्के देने लगा, पर वो धक्के भी पेंटर के धक्के के सामने कुछ भी नहीं थे.

कुछ देर के बाद वो थक कर पीठ के बल लेट गया और मुझे ऊपर बुला लिया, उसको शक ना हो इसलिए मैं उस पर सवारी करने लगी, मुझे दर्द हो रहा था फिर भी जोर से ऊपर नीचे हो रही थी, मेरी स्पीड के वजह से उसने अपना वीर्य मेरे अंदर, कंडोम में उड़ेल दिया.

‘क्यों इतनी जल्दी झड़ गए, मेरा अभी बाकी था!’ मैं उसे दोष देते हुए उसके ऊपर से नीचे उतरी, उसने लंड से कंडोम निकाल कर टेबल लैंप के टेबल पर रखा.

‘दो घंटे बाद की फ्लाईट है, खाना खाते हैं.’
मैंने उठा कर गाउन पहना, दरवाजे पर कुछ हलचल दिखी, शायद पेंटर नीचे चला गया था.

खाना खाते वक्त मैं बोली- घर का कलर का काम चल रहा है, आप भी जा रहे हो, काम कैसे होगा?
‘खाना खाने के बाद पेंटर से बात करता हूँ!’ पति ने मुझसे कहा.

खाना खाने के बाद पति ने पेंटर को बोला- मयंक काम जल्दी खत्म करो!
‘हाँ साहब, लेकिन क्या करें, आदमी लोगों का प्रॉब्लम है, देखता हूँ नहीं तो नाईट शिफ्ट में भी काम करता हूँ.’

‘हाँ चलेगा, दो तीन नाईट शिफ्ट में हो जायेगा क्या?’
‘देखते हैं लेकिन पूरा जोर लगा दूंगा सहाब, नाईट शिफ्ट में कोई डिस्टर्ब करने वाला भी नहीं रहता न!’ वो डबल मीनिंग बोल रहा था.

दो घंटे बाद पति एयरपोर्ट चले गए, पेंटर जल्दी जल्दी हाथ चला रहा था, उसको नाईट शिफ्ट करने में काफी इंटरेस्ट था.

लगभग 8 बजे वो चला गया और दस बजे फिर से आ गया, मैंने मेन डोर लॉक किया, वो तो तैयारी में ही आया था, उसने मेरी गांड पर चपत लगाई.

‘अब कुछ नहीं हाँ… चुपचाप अपना काम करो!’ मैंने उसे ना बोलने का प्रयास किया.
‘हाँ काम ही करना है!’

मैं गाउन मैं थी, पति से सेक्स के बाद मैंने सिर्फ गाउन पहना था, अंदर कुछ भी नहीं पहना था.
उसने हॉल में ही गाउन निकाल कर फेंक दिया और मुझे पूरी नंगी कर दिया, उसने मुझे धक्का देकर सोफे पर गिरा दिया और मेरे पैर फैला कर मेरी बुर को चाटने लगा, उसके लपालप चूसने के वजह से मेरी बुर ने पानी छोड़ दिया- उई माँआआ आआ… स्सस्स…

‘देखा कितनी चुदासी है तू… आज तेरी चुदास मिटाता हूँ!’ ऐसा कह कर उसने जीभ का हमला मेरे चूत पर जारी रखा, मेरी चूत का कोना कोना वो चाट रहा था.
मैं उसके बालों में हाथ डाल कर उसका सिर अपनी चूत पे दबा रही थी और ख़ुशी मेरे सिर को इधर उधर घुमा रही थी.

‘ऊपर बैडरूम में चल!’ मुझे उठाते हुए वो बोला, मैं भी उसके पीछे चल पड़ी.
उसका तगड़ा शरीर, उसका सेक्स करने का जोश देख कर मैं उसका गुलाम हो गई थी, उसके लंड की, उसके गंदे बोलने की मुझे लत लग गई थी.

बैडरूम में जाकर उसने अपने सारे कपड़े उतार दिए और पूरा नंगा हो गया, मुझे घोड़ी बना कर पीछे से मेरी चूत चाटने लगा.

‘ इऽऽऽऽय… ये क्या कर रहे हो…’ जिंदगी में पहली बार किसी ने मेरी चूत को पीछे से चाटा था, पर वो रुकने वाला नहीं था, मेरी बुर चाटने के बाद उसने मेरी गांड के छेद को चाटना शुरू कर दिया.

‘इऽऽऽऽ गंदा… उधर क्या कर रहे?’ मैंने उसे रोकते हुए कहा.
‘लगता है तेरी गांड भी बहुत चुदासी है, जरा जबान लगाने से साली को करंट लगता है!’ मेरी गांड चाटने के बाद उसने मुझे बेड पर बिठाया और खुद बेड पर खड़ा हो गया, मैंने उसका लंड हाथ में पकड़ लिया, थोड़ी देर हिलाने के बाद चूसने लगी.
‘माँ कसम क्या चूसती है!’

वो मेरे मुँह में धक्के देने लगा, थोड़ी देर मैंने मेरे मुँह से लंड को बांहर निकाल लिया.

‘यहाँ पे डालो!’ मैं बुर की तरफ हाथ दिखा कर बोली.

‘मतलब?’ उसने जानबूझ कर पूछा.

‘मतलब चूत में डाल भोंसड़ी के !’ मैं उसे बोली.
‘और अंदर डाल कर क्या करूँ?’ वो मुझे परेशान कर रहा था.
मुझे भी चुदाई का खुमार छा गया था, मैंने उसे उसके अंदाज से जवाब देने के बारे में सोचा- अरे तेरा मूसल जैसा लंड मेरी चूत में डाल और चोद मुझे!
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वो सुन कर खुश हुआ- अब आ गई न औकात पर रंडी साली, गन्दी बातें करने में ही मजा आता है.
वो मुझे चुदाई ज्ञान सिखाने लगा, उसने मुझे पीठ पे लेटाया, अपना लंड मेरी चूत पर सेट किया और पूरी ताकत से अंदर डाला.
‘उम्म्ह… अहह… हय… याह… हरामखोर… फड़ेगा क्या मेरी चूत!’ उसने दोपहर के जैसे मेरी तरफ बिल्कुल ध्यान नहीं दिया और जोरदार धक्के देना चालू कर दिया, उसके बलवान शरीर के नीचे मैं पिस गई थी, पर उसके विशाल लंड की जोरदार चुदाई से मैं सातवें आसमान में पहुंच गई थी.

उसने मुझे उठाया और खुद पीठ के बल लेट गया, मैं उसके ऊपर चढ़ गई.
‘ऐसे ही चुद रही थी न अपने पति से? अब मैं दिखाता हूँ इस पोजीशन में कैसे चुदाई करते हैं.’

मैंने ऊपर नीचे होना शुरू किया, वो नया कुछ भी नहीं कर रहा था, फिर मैंने उसके छाती पे हाथ रखकर स्पीड बढ़ाई और उसने मेरे स्तनों को कस से पकड़ा और नीचे से धक्के देना शुरू कर दिया.
‘तू स्पीड कम मत कर!’ मुझे बोल कर उसने नीचे से जोरदार धक्के देने शुरू कर दिए.

मैं ऊपर होती थी तब मेरे पति ने कभी भी नीचे से धक्के नहीं दिए थे, यह नई बात मुझे मयंक पेंटर से पता चली, मुझे इस आसन में अजीब सा मजा मिल रहा था, मेरा ऊपर नीचे होना और उसका नीचे से जोरदार धक्कों की वजह से मैं जोरदार तरीके से झड़ गई.

वो अब एक सी स्पीड में धीरे धीरे से मुझे नीचे से चोद रहा था, मुझे अब उसके धक्के सहन नहीं हो रहे थे, मुझे ऐसा लगा कि वो भी झड़ने वाला है- अरे, तुमने कंडोम नहीं पहना?
‘मुझे अच्छा नहीं लगता!’
‘पर कुछ हो गया तो?’
‘अपुन फुल कण्ट्रोल में है, दोपहर को भी बाहर ही माल गिराया था.’
‘पर मुझे अंदर लेने में मजा आएगा, ऐसे करो अंदर ही पिचकारी मार दो!’
‘पर कुछ हुआ तो?’
‘कुछ नहीं होगा, मैं गोली खा लूँगी.’

उसने अपनी स्पीड बढ़ा दी तो मैंने उसे रोका और नीचे पीठ के बल लेट गई, वो अपने जंगली तरीके से मुझको चोदने लगा और मेरी चूत के अंदर ही पिचकारी मार दी, उसके साथ ही मैं भी फिर से झड़ गई.

वो पूरी रात मुझे नये नये आसनों में मुझे चोदता रहा.

उसके बाद के दो दिन और दो रातें वो मुझे हर तरह से यूज़ करता रहा, मैंने भी उसका पूरा साथ दिया.
‘दीवारों के कलर शेड से ज्यादा शेड सेक्स में होते हैं!’ यह बात मुझे मयंक पेंटर से पता चली.

उम्मीद है आपको मेरी कहानी पसन्द आयी होगी। अपने सुझाव, शिकायते, प्यार मुझे मेल करते रहें।

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