Meri Madmast Rangili Biwi- Part 4
Meri Madmast Rangili Biwi- Part 4

                          Meri Madmast Rangili Biwi- Part 5

वहाँ दो लड़के थे, कमसिन ही थे… निक्कर और टीशर्ट में… बिल्कुल चुपचाप…
हे मेरे भगवान् ये दोनों लड़के तो ट्रांसपोर्ट वाले थे जिनको मैंने सामान की पैकिंग के लिए बुलाया था।
दोनों ट्रांसपोर्ट कम्पनी में पर काम करते हैं… सामान की पैकिंग में मदद करने आये होंगे।

उनमें से एक तो काला सा था, तो दूसरा कुछ गोरा था, दोनों के अभी मूंछें तक नहीं आई थी… उनको देख कर ही लगता था कि दोनों ने कभी स्कूल देखा नहीं होगा।

काला वाला कुछ सेहतमंद था पर गोरे वाला तो बहुत दुबला सा था।
वे दोनों आँखें फाड़े खड़े थे उनकी निगाहें नीता के चूतड़ों पर ही थी।
दोनों ने जो निक्करें पहनी हुई थी, बहुत ढीली थी, पर तब भी पता चल रहा था कि वे दोनों यह नज़ारा देख कर उत्तेजित हो गये हैं।
लंड वाले स्थान पर लंड से तम्बू बना हुआ था।

मैंने तुरंत नीता को खड़ी किया- ओह्ह… आ गए तुम? ऐसे ही आ गये? दरवाजा पर घन्टी तो बजाते?

पर वे अनपढ़ असभ्य क्या समझते? बस आँखें फ़ाड़े नीता का नंगा बदन घूरे जा रहे थे।

मैंने नीता को चेताया- चल जल्दी से कपड़े पहन और इन लड़को से पैकिंग का काम करवा ले!

मैंने जल्दी से अपना लोअर ऊपर किया और जाकर उन लड़कों से बात करने लगा जिससे उनकी निगाह मेरी नंगी नीता के बदन से तो हटे!

वासना की अग्नि में तपती नीता को होश ही कहाँ था, उससे सही ढंग से चला भी नहीं जा रहा था… मैं उसकी हालत समझ रहा था। वह लड़खड़ाती हुई अपने कपड़ों को उठाने लगी, एक बार दोनों लड़को की तरफ़ देखा…
और वे दोनों कमीने भी पता नहीं मेरी बात सुन रहे थे या नहीं… दोनों की नज़रें नीता पर ही थी।

इस शहर में, घर में रहते हुए पिछले कुछ अरसे में कितना भी कुछ भी यहाँ हो चुका… पर आदतें आसानी से कहाँ बदलती हैं!

नीता जैसी मदमस्त सेक्सी लड़की जिसे अजब गजब बातों में सबसे अधिक मज़ा आता हो, वह इस मज़े का एक भी अवसर कैसे जाने दे सकती थी!

उसने बड़े आराम से धीरे धीरे अपने कपड़े उठाए जैसे कपड़े बहुत भारी हों, उसने अपने एक एक उत्तेजक अंग को उन दोनों लड़कों को देखने का पूरा अवसर दिया, चाहे उसके उरोज हों, चूत हो… चाहे चूतड़… कपड़े उठाते वक्त वो उन लड़कों की तरफ़ अपने चूतड़ करके झुकी तो उसकी गांड का छेद और पीछे को निकली हुई चूत भी उन लड़कों ने खूब अच्छे से देखी होगी।

नीता अपने कपड़े उठा कर नंगी ही बैडरूम में चली गई।
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कहने को तो नीता उन लड़कों की आँखों से ओझल हो गई थी लेकिन वे अभी तक मदहोश थे, मेरी कोई बात उनके पल्ले नहीं पड़ रही थी, वे तो अभी तक बैडरूम के दरवाज़े पर पड़े पर्दे को ही देख रहे थे।

मैंने तेज आवाज में बात की, तब कहीं वे होश में आए, मैंने उनको सारा सामान दिखाया जो पैक करना था।
दोनों बोले- हो जाएगा साब…

तभी मुझे सिगरेट की बहुत तेज तलब लगी, मैंने नीता को बाहर से ही आवाज़ लगाई- मैं अभी आता हूँ सलोनी, इन लड़कों को काम बता दिया है… इन्हें अगर कुछ जरूरत हो तो देख लेना!

मैं लोअर और टीशर्ट में था, कह कर मैं बाहर निकल गया।
लगभग 20 मिनट बाद मैं लौटा तो दरवाजा लॉक था… मुझे हैरानी हुई कि नीता ने दरवाजा क्यों लॉक किया?

और मुझे कुछ समय पहले नज़ारा याद आया… नीता का नंगा बदन और उन दोनों लड़कों के निक्कर में खड़े लंड!
वैसे भी सिगरेट पीने के बाद मेरा दिमाग़ काम करने लगा था, मेरे दिमाग़ में फिर से शक का कीड़ा जाग गया…
क्या अब भी नीता ने इस अवसर का लाभ उठा लिया होगा?
या ऐसे ही उसने दरवाजा लॉक कर लिया?

एक आशंका यह भी हुई कि कहीं उन दोनों लड़कों ने ही?
हो सकता है कि नीता को अकेली देख कर वो गलत काम करने पर उतारू हो गए हों… क्या वे नीता के साथ जबरदस्ती कर रहे होंगे?
यह विचार मेरे मन में आते ही मैं कांप गया।
और जल्दी से मैंने जेब में हाथ डाला, दूसरी चाबी मेरे पास ही थी… विगत समय के हालातों को देख कर अब एक चाबी मैं हमेशा अपनी जेब में रखता था।

मैंने चुपचाप जेब से चाबी निकाल कर ताला खोला… और बिना आवाज़ किये दरवाज़ा खोलकर अन्दर झांका।
यह क्या??
कमरे में कोई नहीं था और सारा सामान वैसे ही बिख़रा पड़ा था, कोई पैकिंग होना तो दूर… किसी सामान को हिलाया तक नहीं गया था।

कहाँ गए वे दोनों लड़के?
चले गये क्या?
या वे अन्दर हैं मेरे बैडरूम में?
जहाँ अभी कुछ मिनट पहले नंगी नीता अपने कपड़े लेकर गई थी।

अंदर हैं तो क्या कर रहे होंगे? जबरदसी तो नहीं ही हो सकती क्योंकि कोई चीख आदि की आवाज नहीं आ रही थी।
आखिर पिछले कुछ मिनटों में हुआ क्या यहाँ और अभी क्या हो रहा है?

बाहर के दरवाज़े से लेकर रूम तक का फ़ासला मुझे बहुत ज्यादा लगने लगा, मेरे पैर जैसे उठ ही नहीं रह थे, मैं एक एक कदम बिना कोई आवाज़ किए रख रहा था, मैं बैडरूम तक जाना चाह रहा था, जानना चाह रहा थ कि आखिर मेरे पीछे हुआ क्या? अन्दर क्या चल रहा है?

अपने दिमाग में ऐसे ही कुछ सवाल लिए मैं दरवाजे तक पहुँचा जिस पर एक पर्दा हमेशा रहता है।
मेरा हाथ उस पर्दे में से झांकने के लिए उठा ही था कि तभी मेरा हाथ जहाँ का तहाँ रुक गया!

अन्दर से एक लड़के की आवाज मुझे सुनाई दी, इस आवाज़ ने ही मेरे कई सवालों के जवाब दे दिए- आअह्ह ह्ह्ह्ह दीदी जी, आप बहुत अच्छी हो… मेरे लंड को जोर से हिलाओ… अह्ह आआह!

मेरा दिल जोर से धड़क गया… चहे यह सब मेरे लिये कुछ नया नहीं था, ऐसा ही कुछ अंदेशा मुझे हो रहा था पर पिछले 2-3 दिन से मेरी बात नीता से हो रही थी, उससे लग रहा था कि शायद अब शहर बदलने के साथ ही इस सब में कुछ परिवर्तन आए!

पर यह आवाज सुन कर मेरी उस सोच पर विराम लग गया कि ऐसा कोई बदलाव नहीं होगा, शहर, स्थान चाहे बदल जाए लेकिन नीता ऐसी ही रहेगी… वो मजे लेने का कोई मौका नहीं छोड़ेगी।

यूँ मैं भी इस सब का इतना आदी हो गया था कि साफ़ सुथरा जीवन अब मेरे बस की बात नहीं थी, एक बार मैं सिगरेट, शराब छोड़ने की सोच सकता हूँ… पर ओपन सेक्स का मज़ा शायद कभी नहीं छुटेगा। रोज रोज नई नई चूतों का चस्का जिसे लग जाये वो कैसे छुट सकता है।

शायद बिल्कुल ऐसा ही नीता के साथ था… नये लंड को देखते ही उसके मुँह में पानी आ जाता है… उफ़्फ़ सॉरी… मुँह में नहीं चूत में… ही… ही… सही बात है ना?

अब तो मुझसे रुका नहीं जा रहा था, अन्दर चल रहे खेल को देखने के लिये मन बेचैन हो रहा था।
मैंने एक तरफ़ से पर्दा हटकर अन्दर झांका… मेरा बेड पूरा दिख रहा था… अन्दर देखते ही मेरी आँखों की चमक तो बढ़ी ही, साथ ही मेरे अण्डरवीयर का आकार भी बढ़ गया।

अन्दर वे तीनों मुझे स्पष्ट दिख रहे थे… दे दोनों लड़के और मेरी सलोनी!

मैंने ध्यान से देखा… काले लड़के के बदन पर जो बनियान थी वो पेट से ऊपर चढ़ी हुई थी, उसकी निक्कर एक कोने में पड़ी थी।
दूसरा गोरे लड़के ने अपने दोनों कपड़े उतार दिये थे… वो नीता के सामने पूरा नंगा खड़ा था, वह था तो पतला दुबला सा, उसकी हड्डियाँ तक दिख रही थी, फिर भी उसका लंड उसके बदन के हिसाब से काफ़ी लंबा लग रहा था, और लण्ड पूरा तना हुआ था।

नीता बिस्तर पर ऊपर से तो टॉपलेस बैठी दिख रही थी, उसके दोनों उरोज ऊपर को तने हुए थे… उन पर गुलाबी निप्पल भी पूरे तने हुए दिख रहे थे… नीचे पलौथी लगाई हुई थी तो पता नहीं चल रहा था कि उसने नीचे कुछ पहना है या पूरी नंगी बैठी थी।

दोनों लड़के उसके पास खड़े थे, दोनों के खड़े लंड नीता के दोनों हाथों में थे, वो उनको ऊपर से नीचे सहला रही थी, मुठिया रही थी, दोनों आँखें बन्द किये नीता के कोमल हाथों का मज़ा ले रहे थे।

मैं उनको देखते हुए उनकी बातें और सीत्कारें सुन कर मज़ा लेने लगा।

सलोनी- नाम क्या है तुम दोनों का?

काला लड़का- मालिक मुझे कलुआ कहते हैं.. आप भी मुझे कलुआ ही कहिये… और इसका नाम पप्पू है…

पप्पू- हाँ दीदी, मैं पप्पू… आआह्ह्ह हाआ दीदी मेरा लंड चूसिए ना… कलुआ का तो गन्दा है.. उसका तो छोटी मैडम भी नहीं चूसती पर मेरा तो अक्सर चूस लेती हैं।

यह सुन मैं चौंक गया, ये कल के छोकरे क्या बोल रहे हैं? ये दोनों ही पूरे चालू और हरामी लग रहे हैं… ये क्या क्या कारनामे कर चुके हैं?

मेरी जिज्ञासा का अन्त तो मुझे पता है कि मेरी नीता कर देगी, उसे सेक्सी किस्से सुनने-सुनाने में बहुत मज़ा आता है, नीता चुदाई के वक्त खूब बातें करती है, मुझे यकीन है कि वो इन लड़कों से सब कुछ बकवा लेगी।

मैंने अपना लंड लोअर से बाहर निकाला और हाथ में लेकर सहलाने लगा।

और मेरे आँख-कान तो पूरी तरह से अन्दर ही लगे थे… मैं उस समय अन्दर का एक भी दृश्य गंवाना नहीं चाहता था।

मैंने नीता की आँखों में एक चमक सी देखी वो बोली- वाह से चिकने… तू तो खूब खेला खाया लगता है? मैं तो समझी थी कि पहली बार देखकर लार टपका रहा होगा?

पप्पू शरमा कए बोला- अरे दीदी ये साला कलुआ… यह भी बहुत हरामी है, इसने तो मेरे से भी ज्यादा चुदाइयाँ करी हैं… इसी बहनचोद ने मेरे को पहली बार चूत दिलवाई और चोदना सिखाया।

यह सुन कर कलुआ तन कर खड़ा हो गया जैसे कोई ईनाम मिलने वाला हो, उसे लगा कि पप्पू उसकी तारीफ कर रहा है।

नीता ने उसके लंड को जोर से हिला कर बोली- यह तो इसके लंड को देखकर ही लगा था मुझे, कैसा नाग सा हो रहा है! अच्छा तुम दोनों ने इतनी हिम्मत कैसे की? तुम्हें कैसे लगा कि मैं कुछ नहीं कहूँगी… तुम्हारी बात मान लूँगी?

इस बार दोनों हँसे और बोला कलुआ- वो तो दीदी, आप पूरी नंगी हमारे सामने बिल्कुल नहीं शरमा रही थी, तभी लग गया था! हमें तो पता लग गया था कि हमें आप की इत्ती प्यारी फ़ुद्दी मिल जाएगी। अह्ह आह…आ… दीदी आराम से…
नीता ने उसके लंड को कस कर मरोड़ दिया, वो चिल्लाया- टूट जाएगा दीदी!

पप्पू- हाँ दीदी, मुझे तो डर लगता है पर यह मादरचोद एकदम से ताड़ लेता है, इसके साथ मुझे भी चूतें मिल जाती हैं।

नीता दोनों के खड़े लंडों को देख रही थी कि अचानक उसने कलुए के लंड पर होंठ टिका दिये।

News Reporter

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