Kamsin Beti Ki Mahakti Jawani- Part 6
Kamsin Beti Ki Mahakti Jawani- Part 6

             Kamsin Beti Ki Mahakti Jawani- Part 1

जब मेघा ने ठीक से वैसे ही करना शुरू किया तो बापू फिर से लेट गया और मजा लेते हुए, वासना में तड़पते हुए आवाज़ निकालने लगा.

मेघा को आँखों को खोलना पड़ा, जब उसने सुना कि उसका बापू कितना तड़प रहा है. खुद मेघा ने महसूस किया कि यह सब करने पर उसकी चूत में ज़्यादा पानी उतर रहा है.

आखिर में बापू ने मेघा को अपने मुँह में लंड को लेने को कहा. मेघा इन्कार कर रही थी, मगर बापू ने समझाया कि जैसे उसने उसकी चूत को चाटा और चूसा था, वैसे ही उसको भी लंड को चाटना चूसना चाहिए. यह सब प्यार करने का एक तरीका होता है और इससे दोनों जनों को बहुत मज़ा और आराम मिलता है.

बहुत समझाने पर इन्कार करते हुए ही मेघा बापू के लंड पर झुक गयी. पहले बापू के कहने पर अपनी जीभ को लंड के ऊपर वाले हिस्से पर फेरा, फिर और एक बार फिर से.. और एक बार.. धीरे धीरे वो अपने बाप का लंड चाटती गयी.. चाटती गयी.. यहाँ तक कि उसने बापू के आधे लंड को अपने मुँह में ले लिया और चुसकने लगी.

बापू ख़ुशी और मज़े के मारे चिल्लाता चला गया- आआआअह.. आह और ज्यादा और अन्दर ले ले.. अपने मुँह में.. आह.. मेरी बिटिया रानी और चूस.. चूसती जा अपने बापू के लंड को.. आह मेरी तो किस्मत खुल गयी रे.. आह आह हाय रे.. हाय.. कितना मज़ा आ रहा है मेरी परी आह…

बापू को उस तरह से मज़ा लेते हुए मेघा ने कभी नहीं देखा था, तो उसने सोचा कि वह अपने बापू को इतना मज़ा दे रही है तो क्यों न अपने बापू को और खुश करे. इसलिए बहुत अच्छी तरह से अपने बापू के लंड को चूसने लगी. साथ ही वो एक साथ पूरे लंड को चूसते वक़्त अपने कोमल हाथों से खड़े लंड को रगड़ने लगी. अब वो अपनी जीभ से ऊपर से नीचे तक लंड को खूब चाट रही थी. उसने अपने बापू के लंड को बहुत चूसा. फिर मेघा ने अपने जीभ पर नमकीन स्वाद महसूस किया तो समझ गयी कि ये बापू का माल है.. तब वो बापू के लंड के छेद पर अपनी जीभ रगड़ने लगी.

उधर बापू उस रगड़ से बेहाल हो रहा था. वो चिल्लाए जा रहा था. मेघा अपनी आँखों को ऊपर उठाकर बापू का हाल बेहाल होता देख रही थी. उसने खुद महसूस किया कि उसको भी मज़ा आ रहा है. बापू के लंड को चूसते हुए एक अजीब सा अलग सा मज़ा आ रहा था, जो उसने पहले कभी नहीं महसूस किया था. बाप के लंड को अपने हाथों में लिए अपने मुँह में लेकर जीभ से चाटते चूसते हुए एक अलग सा मज़ा मिल रहा था, जो मेघा अपनी ज़िन्दगी में पहली बार महसूस कर रही थी.

काफी देर बापू के लंड को चूसने के बाद मेघा बोली- बापू मेरा मुँह दुःख गया.. अब बस करती हूँ.

तब आखिरकार बापू ने मेघा को अपने गोद में इस तरह से लिया कि खुद अपनी गांड पर बैठा था, मेघा की दोनों जांघों को अपनी जांघों के दोनों तरफ बाहर किया और नंगी मेघा अपने लंड पर बिठा लिया. मेघा वैसे ही बैठी और बापू के मोटे लंड को अपनी छोटी चूत पर महसूस करके सिमट गयी. वो अपने बापू के कंधों पर अपनी बांहों को लपेट कर बैठी थी. उसके गाल अपने बापू के गालों से रगड़ खा रहे थे. उसने आँखों को बंद किया और अपने बापू के लंड को अपनी चूत पर नीचे की तरफ रगड़ते हुए महसूस करने लगी. वो धीरे धीरे अपने बापू के कंधों पर दाँत काट रही थी.

पद्मिनी, जिससे बापू को मज़ा आ रहा था.. वो बापू के कहने पर अपने दोनों पैरों पर थोड़ा सा खड़ी हुई और बापू ने अपने लंड पर थोड़ा थूक लगा दिया. कुछ थूक बापू ने मेघा की चूत पर भी मल दिया. फिर मेघा की गांड को ज़रा सा ऊपर उठाकर बापू ने अपने लंड की टोपी को मेघा की चुत पर थोड़ा सा फंसा कर दबाव डाला. मेघा ने एक छोटी से चीख़ मार दी और अपनी गांड को ऊपर उठा लिया. बापू का लंड एक तरफ हट गया.

दुबारा बापू ने फिर वही किया और इस बार जैसे ही उसका लंड मेघा की चूत के छेद में घुसने को था, मेघा ने फिर एक चीख़ देते हुए गांड को ऊपर उठा लिया और लंड फिर निकल गया.

फिर बापू ने मिशनरी पोज में मेघा को लिटाया. उसने मेघा को पीठ के बल लेटा दिया. वो उसको चूमने लगा, उसकी चूचियों को चुसकने लगा और उसके पूरे जिस्म को चाटने लगा. वो चारों तरफ से मेघा को मस्त कर रहा था. अपनी बेटी की चूत में अपना मोटा लंड घुसाने के लिए उसको तैयार कर रहा था.

मेघा आँख मूंदे अंगड़ाइयों के साथ कामुक सिसकारियां लेते हुए बापू को किस कर रही थी. आखिर में बापू ने मेघा की दोनों पैरों को दोनों तरफ फैलाते हुए खुद को बीच में घुसा लिया. अपने हाथों से अपने लंड को मेघा की चुत पर रगड़ा, फिर थूक से गीला करके चूत के छेद में डालने की कोशिश में लगा रहा. हर बार जब लंड घुसने वाला होता था, तो मेघा अपनी कमर हिला देती और लंड एक तरफ हो जाता.

मगर बापू थका नहीं.. हिम्मत करके उसने कोशिश को जारी रखा. उसने अपने दोनों हाथों से मेघा की दोनों जांघों को दबाया और अपने लंड को चूत के छेद में घुसाने की कोशिश की. उसके लंड का ऊपर वाला हिस्सा थोड़ा सा अन्दर घुस गया.
लंड अन्दर जाते ही मेघा ज़ोर से चिल्ला दी- नहीं नहीं.. बापू मुझको डर लग रही है.. दुखेगी.. मत डालो अन्दर प्लीज..

बापू ने मेघा को प्यार से सहलाया, गालों पर अपने हाथों को फेरा, मेघा को किस किया, बहुत फुसलाया.. फिर अपने कार्य को जारी रखा.

बापू ने मेघा की चूचियाँ सहलाते हुए उसकी चूत में एक हल्का सा धक्का मारा और उनका आधा लंड मेघा की कुंवारेपन की झिल्ली तोड़कर अन्दर घुस गया. मेघा दर्द से आह आह कर उठी. फिर थोड़ी देर उसने मेघा के होंठों और चूचियों का मर्दन किया. जब मेघा का दर्द कम हुआ और वह मज़े से बापू को देखने लगी, तब बापू प्यार से बोला- बेटा दर्द कम हुआ?
मेघा ने हाँ में सर हिलाया.

अब बापू ने और ज़ोर से धक्का मारा और उसका पूरा मूसल लंड मेघा की नन्ही सी चूत की गहराइयों में धँस गया.

मेघा को यूं लगा कि उसके अन्दर किसी ने कील ठोक दी है. वह दर्द से बिलबिला उठी. बापू उसके आँसू पोंछते हुए उसकी चूचियाँ दबाता रहा और होंठ चूसता रहा.

थोड़ी देर में मेघा ने महसूस किया कि अब दर्द कम हो गया और मज़ा आने लगा. मेघा ने बापू से कहा कि बापू अब अच्छा लग रहा है.
बापू मुस्कराया और बोला- बेटी.. चुदाई का असली मज़ा तो अब आएगा.

ये कहते हुए उसने अपनी कमर को उठाकर अपना आधा लंड बाहर किया और फिर अन्दर ज़ोर से अन्दर जड़ तक पेल दिया. मेघा की मस्ती से आह निकल गई और वह ‘आह आह उफ़्फ़, बापू और ज़ोर से चोदो..’ बोल उठी.

बापू ख़ुश होकर बोला- वाह बेटी, तुम तो अपनी माँ से भी बड़ी चुदक्कड़ निकलोगी, क्योंकि उसके मुँह से चोदना शब्द निकालने में मुझे दो महीने लग गए थे. तुमने तो चार धक्कों में चुदाई सीख ली और बोलने भी लगी. शाबाश.. बस ऐसे ही चुदवाओ.
यह कहते हुए उसने मेघा को ज़ोर ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया.

मेघा के मस्ती से भरे अंगों को दबाते हुए बापू उसे बहुत ज़ोरदार चुदाई से मस्त कर दिया. मेघा भी मज़े से सिसकारियाँ भर रही थी.
फिर उसका शरीर अकड़ने लगा और वो चिल्लायी- बापू मैं तो गयी..
वो अपने जिस्म को थिरकाते हुए झड़ने लगी. उसी समय बापू भी धक्के मारते हुए आह आह करके झड़ गया.

दो पल बाद बापू उठ गया और उसने अपना लंड अपनी बेटी की चूत से बाहर निकाला. लंड का माल टपक रहा था. इसकी परवाह किए बिना बापू मेघा के बग़ल में लेट गया. फिर वो मेघा को बांहों में लेकर प्यार करने लगा.
कुछ देर बाद वो बोला- चलो, गुसलखाने में चलते हैं.

मेघा उठकर अपनी चूत देखने लगी, क्योंकि उसे वहाँ जलन सी हो रही थी. उसकी नज़र चादर पर पड़ी, जिसमें लाल ख़ून का दाग़ लगा था. उसकी चूत में भी ख़ून की बूँदें दिख रही थीं.

तभी बापू ने मुस्कारते हुए अपने लटके हुए लंड को दिखाया, जिसमें लाल ख़ून लगा हुआ दिख रहा था.
बापू बोला- जब लड़की पहली बार चुदती है, तो उसकी चूत से थोड़ा सा ख़ून निकलता है. बेटा, ये सामन्य सी बात है.
मेघा बोली- बापू यहाँ नीचे थोड़ा दर्द और जलन भी हो रही है.
वो बोला- बेटी, पहली बार में ये सब होगा, कल तक सब ठीक हो जाएगा.

फिर वो दोनों उठे और बापू मेघा को गोद में उठाकर उसे चूमते हुए गुसलखाने में ले गया. वहाँ उसने उसे पेशाब करने बैठा दिया.

मेघा सू सू करने लगी. वो प्यार से मेघा के सर पर हाथ फेर रहा था. उसका लंड मेघा के सामने लटक रहा था.

फिर बापू भी लंड उठाकर सु सु करने लगा. मेघा मंत्र मुग्ध होकर उसके लंड और उससे निकलने वाली सु सु को देख रही थी.

फिर बापू ने लंड हिलाकर आख़िरी बूंद भी निकाली. इसके बाद वो मेघा के पास आया और बोला- चलो बेटी तुम्हें नहला दूँ, पसीने से भीग गयी हो और मेरे रस से भी सनी हो.

बापू मेघा की चूत की ओर इशारा करते हुए बोला कि चलो आज हम दोनों एक साथ नहाएँगे.
यह कहते हुए मेघा को अपनी बांहों में भर लिया और चूमने लगा. साथ ही वो अपने हाथ को मेघा के चूतड़ों पर फेरने लगा. मेघा भी अपने बापू से चिपक गयी थी.

फिर बापू ने मेघा का हाथ उठाया और नल से फव्वारा जैसा पानी बनाते हुए उसे नहलाने लगा और अपने शरीर में भी पानी डालने लगा.

फिर नीचे बैठकर उसने मेघा की चूत और जाँघों में साबुन लगाया और उससे घूमने को बोला. मेघा घूमी और अब उसका बाप उसके चूतड़ों पर साबुन लगाने लगा. मेघा ने गुसलखाने के शीशे में देखा कि बापू का लंड अब खड़ा होने लगा था.

बापू ने मेघा की चूतड़ों की दरार में हाथ डाल दिया और उसकी गांड के छेद में साबुन लगाया. बापू का हाथ जैसे वहाँ से हटने का नाम ही नहीं ले रहा था. वो बार बार मेघा की गांड के छेद में रगड़े जा रहा था.

अब बापू खड़ा हुआ और पानी से खुद को नहलाया. बाद में उसने तौलिए से अपना और मेघा का शरीर पोंछा. इसी दौरान बापू ने नीचे बैठ कर मेघा की चूत की एक मस्त पप्पी ले ली.

फिर घूमकर बापू मेघा का पिछवाड़ा पौंछने लगा. मेघा ने शीशे में देखा कि बापू ने उसके चूतड़ों को फैलाया और अपना मुँह उसकी दरार में डाल दिया. अब उसको बापू की जीभ अपनी गांड के छेद पर रगड़ने का अहसास हुआ. वो क़रीब 5 मिनट तक उसकी गांड चाटता रहा.

मेघा के पाँव उत्तेजना से काँपने लगे और वह बोली- छी: बापू, क्या गंदी जगह को चाट रहे हो.
बापू बोला- बेटी, तेरी कुँवारी गांड बहुत मस्त है. बहुत जल्दी मैं तेरी गांड भी मारूँगा.

मेघा बोली- आप माँ की भी गांड मारते थे?
पापा- हाँ बेटी, वो तो बहुत मज़े से अपनी गांड में लंड करवाती थी. अगर 3-4 दिन उसकी गांड नहीं मारता था तो वो तो कहने लगती थी कि सुनो जी, मेरी गांड खुजा रही है, आज इसमें ही डाल दो.
मेघा तो ये सुनकर हैरान ही रह गयी.

फिर दोनों वापस कमरे में आ गए. बापू का लंड अब फिर से तना हुआ था. उसने मेघा को अपने गोद में खींच लिया. बापू ने फिर से मेघा को चूमना शुरू किया और उसकी चूचियाँ दबाने लगा. साथ ही उसके निप्पलों को भी मसलने लगा. वह मजे से आह कर उठी.
फिर बापू बोला- बेटी, तेरी चूत अभी भी दर्द कर रही है क्या?
मेघा बोली- जी बापू, अभी भी हल्का दर्द है.

बापू- बेटी, मेरा तो अब फिर खड़ा हो गया है, मैं अभी तो तेरी गांड नहीं मारूँगा क्योंकि तेरी गांड में अभी मुझे बहुत मेहनत करनी होगी, तभी वो आराम से मेरा लंड लेने को तैयार होगी. पर तू अपने बापू का लंड चूस तो सकती ही है, मुझे इसमें बड़ा मज़ा आएगा और मेरा लंड शांत भी हो जाएगा.

मेघा अपने बाप का लंड चूसने को राजी हो गयी.
बापू बोला- तुम बैठ जाओ.. मैं खड़े होकर तुम्हारे मुँह में अपना लंड डालता हूँ.
अब वो मेघा को बैठाकर, अपना लंड उसके मुँह के सामने लाया, मेघा ने भी उसे चूमना और चाटना शुरू किया. वो हल्के से मेघा के मुँह में धक्के लगाने लगा. मेघा ने भी मस्ती में आकर लंड चूसना शुरू कर दिया.

थोड़े देर में बापू आह आह करने लगा और बोला- आह बेटी, तुम तो बहुत मज़ा दे रही हो. आह आज तो तुम्हारी माँ की याद आ गयी, वो भी ऐसे ही लंड चूसती थी, काश तुम मेरी बीवी होती तो खुलेआम भी खेल सकती थी.

फिर वो लंड से बहुत ज़ोर से धक्के मारने लगा और बोला- बेटी, तुम अपने बापू का रस पियोगी ना? बहुत स्वादिष्ट लगेगा, शुरू में हो सकता है तुमको इसका स्वाद अच्छा नहीं लगे, पर जल्दी ही तुम इसकी दीवानी हो जाओगी. तुम्हारी माँ तो इसकी दीवानी थी. बोलो ना अब मैं झड़ने वाला हूँ, तुम लंड रस पियोगी ना?
मेघा ने बापू का लंड चूसते हुए, उसकी तरफ़ देखकर हाँ में सर हिला दिया.

बापू ख़ुश हो गया. फिर जल्द ही उसने धक्कों की गति बढ़ा दी.. और चिल्लाना शुरू कर दिया- हाय बेटी.. मैं झड़ा..
यह कहते हुए उसने अपना रस मेघा के मुँह में छोड़ना शुरू कर दिया. मेघा को उसके वीर्य का स्वाद शुरू में तो अच्छा नहीं लगा, पर जल्दी ही मैं उसे गटक कर पी गयी. बाद में उसे स्वाद ऐसा कोई बुरा भी नहीं लगा. बापू तो जैसे मस्त हो गया. मेघा के मुँह में लगे हुए अपने वीर्य को साफ़ करके उसने उसे बहुत प्यार किया और फिर उसे बांहों में लेकर सो गया.

उम्मीद है आपको मेरी कहानी पसन्द आयी होगी। अपने सुझाव, शिकायते, प्यार मुझे मेल करते रहें।

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News Reporter

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