Dost Ki Biwi Bani Mashuka- Part 2
Dost Ki Biwi Bani Mashuka- Part 2

                    Dost Ki Biwi Bani Mashuka- Part 3

यश और जिम्मी भाभी के घर से लौट कर आया तो रोमा ने मुझे उत्तेजित करके सेक्स किया।

अगले दिन यश दोपहर को मेरी फैक्ट्री आये और बोले- चल ठण्डा पिला!
मैंने फ्रिज से बोतल निकाल कर उसे दो गिलासों में करी।
ठंडा पीते पीते मैंने उनको सॉरी बोला।

यश हंसकर बोले- सॉरी तो तुझे बोलना चाहिए पर जिम्मी को जिसका बर्थडे तूने ख़राब कर दिया।
वो बोले- चाहे फिर कभी नहीं मानता, पर कल तो तुझे जिम्मी को किसी बात के लिए मना नहीं करना चाहिए था।

मैंने यश को बोला- आप मेरी ओर से भाभी को सॉरी बोल देना!
यश बोले- गलती तूने की है, सॉरी तुझे खुद घर आकर बोलनी होगी।

मेरी हिम्मत नहीं पड़ रही थी, घर आने की तो यश ने अपने मोबाइल से जिम्मी का नंबर मिलाया और बोले- ले सनी से बात कर ले!

जिम्मी ने मुझसे फ़ोन पर चुम्बन करते हुए कहा- जो कुछ हुआ, वो सबकी मर्जी से हुआ… उसे भूल जाओ और आज घर आ जाना!

मैं शाम को फैक्ट्री से घर जल्दी आ गया और रोमा को झूठ बोल कर कि मुझे किसी पार्टी के साथ फैक्ट्री पर ही डिनर करने जाना है, नहा धोकर निकल लिया।

घर से निकला ही था कि यश का फ़ोन आ गया- कितनी देर में आ रहा है?

मैंने कहा- तुम लोग खाना खा लो, मैं रात को आऊँगा, जब तुम फ्री हो जाओ तो मुझे फोन कर देना!

जब आदमी बेईमानी पर आता है तो वो बहुत प्लानिंग करता है, मैंने होटल से खाना पैक कराया, फैक्ट्री जाकर खाना खाया।

तभी यश का फ़ोन आ गया।
अब मेरे पास यदि रोमा शक करती या कुछ पूछती तो होटल का बिल भी था और यश के घर जाने का बहाना भी था कि यश ने फ़ोन करके बुलाया था।

मैं रात को नौ बजे करीब यश के घर पहुँचा, यश ने मेन गेट खोला और मुझे अन्दर करके बंद कर दिया।
चाचाजी चाचीजी अपने कमरे में सोने की तैयारी में होंगे, हम दबे पाँव ऊपर आये।

जिम्मी भाभी ने आज काले रंग की स्लीवलेस मिडी पहन रखी थी और गोरी होने से उसके ऊपर खूब फब रही थी।
जिम्मी की आँखें नशीली हो रही थी।

यश ने मुझसे कहा कि मैंने जिम्मी को उसके बर्थडे पर रुलाया है, इसलिए अब मैं ही उसे खुश करूँगा।

मैंने जिम्मी के पास जाकर सॉरी बोला तो उसने मेरे बाल पकड़कर मुझे अपनी ओर खींचा और होठों से होंठ मिला दिये।

मुझे लगा कि शायद यही सही है तो मैंने कुछ एतराज नहीं किया और जिम्मी के सर के पीछे दोनों हाथ ले जाकर उसे अपनी ओर भींच लिया और अपनी जीभ उसके मुंह के अन्दर कर के उसकी जीभ को चूसने लगा।

वो पागलों भी की तरह मेरी जीभ को अपनी जीभ से चूस रही थी।

अब अचानक ही मेरा एक हाथ उसके मम्मों पर आ गया और उसका एक हाथ मेरे लंड को टटोल रहा था।
अचानक ही यश की आवाज़ आई- अरे भाई हमें भी शामिल कर लो बर्थडे पार्टी में!

सच में हम दोनों को ही झटका लगा… वाकयी हम तो यह भूल ही गए थे कि कमरे में यश भी है।
पर जिम्मी बहुत प्रैक्टिकल निकली, उसने यश को भी खींचा और अब उसके होंठ यश के होंठों से मिल चुके थे और उसके एक हाथ में मेरा और दूसरे हाथ में यश का लंड था।

मैं भी थोड़ा झुककर उसकी मिडी के ऊपर से ही उसके मम्मे चूस रहा था।
यह देख यश ने उसकी मिडी उठाकर उसकी चूत में अपनी उंगली कर दी थी।

दो मिनट के बाद ही जिम्मी ने हम दोनों को धक्का देकर अलग कर दिया और नीचे बैठकर कभी मेरा कभी यश का लंड चूसने लगी। उसका चूसने का स्टाइल ऐसा ग़जब था जैसे वो चूस कर अंदर का माल निकालना चाहती हो।

यश और मेरे दोनों के लंड पूरे तने हुए थे। भाभी शिश्न की खाल को अपने हाथ से आगे पीछे कर के पूरी उत्तेजना पैदा कर रही थी।

यश ने थोड़ा झुक कर जिम्मी की मिडी ऊपर खींच कर उतार दी।
हम लोगों ने भी अपने पूरे कपड़े उतार दिये।
अब हम तीनों बिल्कुल नंगे थे।

जिम्मी खड़ी हुई और हम दोनों के हाथ पकड़कर बेड तक ले गई, वो बीच में लेटी, उसकी एक ओर मैं और दूसरी ओर यश था।

उसने अपने हाथों में हम दोनों के लंड ले लिए, मैं उसके होंठों से चिपक गया, मेरे हाथ उसके चेहरे को मजबूती से अपनी ओर भींचे हुए थे।

यश को कुछ और समझ में नहीं आया तो वो जिम्मी से अपना लंड छुड़ाकर उसकी चूत को चूसने लगा।
जिम्मी की चूत तो पहले ही पानी छोड़ चुकी थी।

यश ने अपनी जीभ उसकी चूत में पूरी अन्दर कर रखी थी और उसने उसकी चूत में अपने मुँह से खूब सारा थूक भी वहाँ डाला हुआ था जो बहकर जिम्मी की गांड तक आ रहा था।

यश के चूमने चाटने से जिम्मी की आग बहुत भड़क उठी थी।

अब मैं भी उसके होंठ छोड़कर उसके मम्मे चूस रहा था। जिम्मी के मम्मे मांसल और गोरे थे और उसकी निप्पल भी उठी हुई थी। निप्पल के चारों ओर भूरे रंग की गोलाई थी, कुल मिलकर हूरों जैसा रूप था जिम्मी का…
शायद किसी के लिए भी उसके नजदीक आना एक नसीब की बात थी और ऐसे हुस्न की मलिका आज नंगी मेरी बाँहों में थी।

यश ने चूत चूसते चूसते अपनी एक उंगली जिम्मी की गांड में कर दी, जिम्मी हल्का सा चीखी!

तभी मैंने उसके निप्पल पर दातों से काटा था, मुझे लगा कि जिम्मी मेरे काटने से चीखी है तो मैंने अपने होंठों से उसका मुँह सिल दिया। यश ने भी अपनी जीभ की स्पीड और बढ़ा दी।

जिम्मी ने मेरे कान में फुसफुसा कर कहा- अन्दर आ जाओ!
मैं वहाँ से हटा तो यश को भी हटना पड़ा और यश एक बार बेड से नीचे उतरा।

मैंने मौका साफ़ देखा तो जिम्मी की टांगों के बीच में आ गया और धीरे से उसके ऊपर आ गया, जिम्मी ने अपने हाथ से मेरा लंड पकड़ा और अपनी चूत के ऊपर रख दिया।

मैंने भी अपने लंड का दवाब जिम्मी की चूत पर डाला और धीरे से उसकी चूत के अन्दर किया। चूंकि जिम्मी की चूत को यश पहले ही चिकना किये हुए था, इसलिए जिम्मी को एक नए लंड से कोई दिक्कत नहीं हुई।

जिम्मी भाभी और मेरे लिए अपने साथी के अलावा किसी अन्य से सम्भोग करने का पहला अवसर था इसलिए आग पूरी लगी हुई थी, दो जिस्म एक होने को बेक़रार थे, हम भूल चुके थे कि यश कमरे में ही है।

जिम्मी ने अपनी बाहें मेरी गर्दन में डालकर मुझे झुका लिया था और मैं भी अपना लंड पूरा अन्दर कर चुका था। जिम्मी की कामाग्नि भड़क चुकी थी, वो मेरे लंड को और गहराई से अन्दर करना चाह रही थी।

मैंने धक्के देने शुरू किया… अब जिम्मी की सीत्कारें निकलने लगी, वो हाँफ रही थी और कह रही थी- सनी और अन्दर करो… जोर से करो, और तेज करो प्लीज सनी… मुझे पूरा मजा दो… आज फाड़ दो मेरी चूत को!

मैंने भी पूरा जोर लगा कर अपनी स्पीड बढ़ा रखी थी।

अब यश भी अब बेड पर पर जिम्मी के सर के पास आ गया था, जिम्मी ने हाथ बढ़ाकर यश का लंड अपने मुँह में ले लिया।

यश मुझे देखकर मुस्कुराया, मैंने अपने हाथ से यश का हाथ पकड़ा।

तभी मुझे लगा कि मैं छूटने ही वाला हूँ, मैंने कहा- जिम्मी भाभी, मैं आने वाला हूँ कहाँ निकालूँ?

जिम्मी ने मुझे भींचते हुए कहा- बाहर मत निकालना!

मैं दो-चार धक्कों में ही आ गया, मैंने अपना सारा माल जिम्मी भाभी की चिकनी चूत में डाल दिया और साफ़ करने के लिए उठने की कोशिश की पर जिम्मी ने मुझे जकड़ लिया, बोली- कहीं मत जाओ, ऐसे ही पड़े रहो!

News Reporter

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