Bhai Behan Ka Yarana- Part 1
Bhai Behan Ka Yarana- Part 1

                  Bhai Behan Ka Yarana- Part 2

आप सब परिचित ही होंगे। अगर नहीं तो पहले याराना के सभी भाग पढ़ें, तभी यह कहानी आपको संपूर्ण मजा देगी।

यह आगे की कहानी है:
विनीत और मेरे यानि सुमेर की बीवियों की अदला बदली की घटना घटित होने से पहले, मेरा साला यानि मेरी बीवी आशा का भाई संजय की शादी के समय की बात है। संजय ने विदेश में जाकर बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई की थी और वह एक बड़ी कंपनी का कर्मचारी था।

शादी के लिए काफी लड़कियां देखने के बाद उसे एक लड़की पसंद आई थी जिसका नाम था सीमा। अंजू वास्तव में एक रूप की परी थी। यह संजय की पढ़ाई में मेहनत और अच्छी कंपनी में होने का ही नतीजा था कि उसे अंजू जैसी बीवी मिली। अंजू आजकल के चलन जीरो फिगर के अनुसार ही परफेक्ट शरीर वाली थी उसके शरीर की एक खास बात यह थी कि वह काफी लंबी थी।
उत्तेजना पैदा करने वाले चेहरे वाली अंजू लंबाई और शरीर में फिल्मों की हीरोइन कृति सेनन जैसी थी।

मैं और आशा शादी में 4 दिन के लिए सम्मिलित हुए थे। सब कह रहे थे ‘वाह… यह तो फिल्म हीरोपंती की नई हीरोइन जैसी लग रही है।’
हालांकि तब तक मैंने ना हीरोपंती देखी थी ना उसकी हीरोइन। यह बात तो उसकी शादी के काफी समय बाद मैंने महसूस की जब मैंने फिल्म देखी। तब अनायास ही मेरे मुंह से निकल गया- वाह! यह तो अंजू जैसी लगती है।

अंजू ने भी बिजनेस मैनेजमेंट का कोई कोर्स किया हुआ था लेकिन संजय की बड़ी जॉब की वजह से उसने नौकरी ज्वाइन नहीं की।

शादी के वक्त संजय ने मेरे साथ बहुत वक्त गुजारा क्योंकि मैं उसका सगा जीजा था। हमने उसकी शादी में बहुत मजे किए। आशा भी अपने भाई की शादी में कयामत ढा रही थी। जी हां, वही आशा तमन्ना भाटिया और अदा खान के मिक्स चेहरे और शरीर के मालकिन।

वधू पक्ष के काफी लड़के आशा को घूर रहे थे और बहाने बहाने से उसके पास भटक रहे थे और किसी ना किसी बहाने से उससे बात करने की कोशिश कर रहे थे और करे भी क्यों ना आशा चीज ही ऐसी थी।
संजय की शादी में बड़े जाने माने लोग आए थे क्योंकि वह एक बड़े परिवार का पुत्र था। सबसे ज्यादा आश्चर्यचकित करने वाली हस्ती हिमाचल के पहाड़ों से प्रसिद्ध कुख्यात अनंत बाबा (बदला हुआ नाम) शादी में आए थे. उनके बारे में कहा जाता था कि वह जो भी बोलते थे वह सत्य हो जाता था, अतः बाबा व्यर्थ कुछ भी नहीं बोलते थे, केवल आशीर्वाद के लिए अपना हाथ उठाते थे।
मेरे ससुराल पक्ष वाले परिवार पर उनकी बड़ी कृपा थी जिसके कारण मेरा ससुराल पक्ष प्रतिष्ठित परिवार बना था।

संजय ने शादी के वक्त मेरे मेरे सामने एक प्रस्ताव रखा, उसने कहा- जीजा जी, आप जो प्रोडक्ट बनाते हैं, उसका काफी नाम है। मैं चाहता हूं कि यह प्रोडक्ट एक शहर का जाना माना नाम ही ना बनकर भारत में पहचान बनाए! और इसका पहला कदम होगा जब हम अपने पास के बड़े शहर जयपुर में इसकी शुरुआत करें क्योंकि मेरी जॉब जयपुर में ही है तो मैं वहां एक ऑफिस खोलकर, वहां कुछ कर्मचारी रख कर यह मैनेज कर सकता हूं।

मुझे उसका विचार अच्छा लगा, मैंने उसे सहमति दी।

संजय की शादी के कुछ समय बाद उसने मुझे एक दिन जयपुर बुलाया और हमारे नए प्रोडक्ट का नया ऑफिस बताया। मैं तो आश्चर्यचकित हो गया था उसने बिना बताए लाखों की लागत से ऑफिस खरीद लिया था और उसे चलाने की तैयारी भी शुरू कर दी थी।
कुछ ही महीने के अंदर-अंदर उसके जयपुर के ऑफिस से मेरे प्रोडक्ट को 15 लाख का कारोबार मिला और अब वही हुआ, इसकी पहचान बन गई थी।

इस बीच मेरे, विनीत आशा और प्रीति का याराना वाला वह के अदला बदली का किस्सा घटित हुआ।

एक दिन मेरे प्रोडक्ट के लिए संजय के जयपुर के ऑफिस में 90 लाख का ऑर्डर आया। बिजनेस फैल चुका था, संजय ने इसके लिए अपनी बड़ी कंपनी की नौकरी छोड़ दी और वह यहां अपने ऑफिस में हेड मैनेजर बन गया था।
अब क्योंकि प्रजंटेशन और बाकी के सारे जरूरी कामों के लिए प्रोडक्ट के मालिक की बहुत जरूरत होने लगी तो अब मुझे जयपुर ही शिफ्ट होना पड़ा। घर वालों ने आशा को साथ रखने के लिए जयपुर जाने की अनुमति दे दी थी। वहां का प्रोडक्शन बिज़नेस पिताजी और छोटा भाई चला रहे थे, मैं अब अपने व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए जयपुर आ गया था।

रहने की व्यवस्था संजय ने कर ली थी, उसने एक बड़ा दो बेडरूम वाला फ्लैट किराए से लिया जो कि शानदार लोकेशन पर था वास्तव में बहुत शानदार फ्लैट था। बड़ा किचन और बड़े-बड़े बाथरूम जोकि कई तरह के शावर से सिरमोर थे, जैसे कि कोई पांच सितारा होटल! विदेश में पढ़ाई करने और बड़ी कंपनी में जॉब करने से उसका लिविंग सेंस शानदार था। यह उस की ही देन थी। अंजू के हाई क्लास लिविंग सेंस की वजह से भी ऐसा था।

संजय और मेरा परिवार साथ ही रहने वाले थे। यानि कि हम चारों आशा और मैं तथा संजय और सीमा।

आशा और अंजू दोनों ननद भाभी की अच्छी मेल खाती थी, दोनों एक तरह से सहेलियां थी। आशा हालांकि एक अच्छी बहू थी लेकिन पति के साथ अलग रहना हर लड़की का ख्वाब होता है। शादी से पहले आशा काफी खुले विचारों की थी, जींस और छोटे कपड़े पहनना उसके शौक में शुमार था लेकिन उसने अपनी बहू की जिम्मेदारी को समझते हुए सबसे मोह छुड़ा लिया था।

एक महीने बाद वह दिन आ गया जब हम चारों फ्लैट में शिफ्ट हुए। आशा और अंजू फ्लैट देखकर बहुत खुश हुई, केवल 4 ही लोगों का काम होने से उन्होंने केवल सुबह फ्लैट की सफाई के लिए बाई लगाने की सहमति दी। खाना दोनों खुद बनाना चाहती थी।

शिफ्ट होने के 15 दिन तक तो ऑफिस सेट अप करने और ऑफिस के एंप्लाइज की जॉइनिंग के साक्षात्कार में ही लग गए। सुबह 9:00 बजे जाते तो आने में रात को 10:00 बज जाते। इस बीच मेरी अंजू से केवल ना के बराबर बात हुई।
क्योंकि संजय और आशा तो भाई बहन थे तो उनकी बातें ज्यादा हो जाती थी पर अभी चारों के बीच याराना नहीं था। यह तो याराना कहानी की पूरी पृष्ठभूमि बदलने की बातें थी।

अंतर्वासना की वासना वाली बातें तो अब शुरू करते हैं।

जब ऑफिस और घर दोनों जम गए तब संजय और हमने 2 दिन की सप्ताहांत पर छुट्टी करने की सोची, अतः दोनों घर पर ही रहे।
जब सुबह हम उठे तो दोनों की बीवियां नाश्ते पर हमारा इंतजार कर रही थी। हम थोड़ा समय लेकर डाइनिंग टेबल पर पहुंचे।

आशा और अंजू ने इन दिनों काफी सारी शॉपिंग की थी। ससुराल में साड़ी पहनने वाली आशा की जगह अब छोटी पैंटी समान जींस के निकर ने ले ली थी जिससे आशा की गोरी और भरी हुई बालों रहित जांघों के दर्शन हो रहे थे जो उत्तेजना का भाव पैदा करने वाले थे।
अंजू ने भी इसी तरह का छोटा निकर पहना हुआ था। आज फ्री होने के कारण मेरा ध्यान अनायास ही उसके आशा से पतली गोरी गोरी जांघ पर गया लेकिन बाकी तीनों के वहां होने से मैं उसकी गोरी टांगों को घूर के मन भर के नहीं देख पाया।

अभी तक अंजू के लिए मन में कोई बुरे विचार नहीं थे लेकिन आज सफेद चमड़ी से सटे निक्कर में अंजू को देख कर मन में अचानक से एक हिलोरा आया।
संजय अंजू की शादी के 2 साल बाद मैंने अंजू को यहीं फ्लैट में ही अच्छे से देखा था, काफी मॉडर्न थी। लेकिन हमारी बातचीत कम ही हुई थी जितनी जरूरत हो। यह समय की कमी की वजह से था लेकिन अब हमारे पास वक्त था।

टेबल पर थोड़ी अनौपचारिक बातचीत और नाश्ते के बाद महिलाएं अपने काम में लग गई और संजय और हम टाइम पास करने लगे। बिजनेस के इधर उधर की बातों के बाद हम अपने अपने कमरे में तैयार हुए और दिन में आराम करने लगे।
आशा मेरे पास थी लेकिन मेरे दिमाग में अंजू छाई हुई थी।

मैं खुश था कि आशा अंजू इसी तरह के कपड़े घर में पहनने के लिए लाई थी जो कि उसने मुझे बताए थे कि चलो घर में मेरी वासना का समाधान आशा के साथ अंजू का अंग प्रदर्शन भी रहेगा। मैं चाहता था हम चारों रिश्तेदार ना रह कर यार बन जायें।
इसलिए हम चारों एक को एक दूसरे के साथ घुलना जरूरी था।
क्योंकि आशा अंजू ननद भाभी और संजय आशा भाई बहन होने से उनकी तो फिर भी बातचीत जान पहचान थी लेकिन संजय मेरे बीच गंदी बातें ना करने की मर्यादा थी। हम अभी तक दोस्त नहीं थे।

मैंने चारों को घुलने मिलने के लिए ऑनलाइन फिल्म की टिकट करवा दी।
फिल्म कैमरॉन डाइज की सेक्सटेप सेक्स कॉमेडी थी, चारों इसे देखकर खूब हंसे। घर आते वक्त कार में फिल्म के अश्लील जोक पर हम खूब हंसे। इस तरह हमारे काफी घुले-मिले रिश्तेदार से यार होने की शुरुआत होने लगी।

घर पहुंचने के बाद मैंने अपनी पत्नी की जोरदार ठुकाई की और लगभग 2:00 बजे थे, आंखों में नींद समाने ही वाली थी कि पास के कमरे से अंजू के दर्द और मजे से मिश्रित जैसी सेक्स करते हुए आह आह की आवाज आने लगी.
मैं चकित था क्योंकि हमारे सेक्स करने में कभी इस तरह की तेज आवाजें नहीं निकलती थी। ऐसा सिर्फ मैंने फिल्मों में देखा था कि पोर्न फिल्मों की नायिका जोर से आह आह कर रही है।

आशा को भी नींद नहीं आई थी वह मेरी तरफ देख कर हंसने लगी.
मैंने आशा से कहा- यह सब क्या है?
तो आशा ने मुस्कुराते हुए कहा- आप तो ऑफिस के काम की वजह से जल्दी से थक कर सो जाते थे लेकिन पिछले 15 20 दिनों में मैंने यह आवाज तीन चार बार पहले भी सुनी है।
मैंने आशा से कहा- तो इसका मतलब क्या है? संजय वाइल्ड सेक्स करता है या फिर अंजू को शादी के इतने समय बाद भी संजय का लिंग लेने की आदत नहीं हुई है।

अपने भाई के बारे में ऐसी बात सुनकर आशा ने मुझे टोका और कहा- आप उनके बेडरूम में इतना ज्यादा इंटरेस्ट क्यों ले रहे हो?
मैंने बात को वापस वहीं पर रख कर कहा- छोड़ो ना फालतू बातें, यह बताओ यह सब है क्या?
तो आशा ने कहा- देखो यह केवल दर्द से चीखने की आवाज नहीं है इसमें मजे की ध्वनि भी सम्मिलित है, इसका मतलब अंजू को आनन्द तो आ ही रहा है, थोड़ा दर्द भी हो रहा है।

मैंने आशा से कहा- इसका मतलब तुम्हारे भाई का लिंग या तो काफी बड़ा है या काफी दम रखता है।
इस पर आशा ने मुझे डांट कर चुप करा दिया और कहा- एक बहन के सामने उसके भाई की ऐसी बातें करते हुए आपको शर्म आनी चाहिए।
मैं- यह देखो अपने पति के मित्र के साथ सोने वाली पतिव्रता नारी! आज कितनी सज्जनता वाली बात कर रही है.
आशा- यार, विनीत की बात अलग थी। यह सब हमने सम्मिलित रूप से किया था और इसमें हम सब भागीदार थे लेकिन संजय मेरा भाई है मुझे ऐसी बातें करना अच्छा नहीं लगता।

मुझसे नाराज होकर तथा डांट कर आशा सो गई.

उसके करीब आधे घंटे बाद तक अंजू की सेक्स में मजे लेने वाली आवाज आती रही जैसे कि कोई पोर्न फिल्म की आवाज आ रही हो। जब उनकी आवाज बंद हुई, उसके आधे घंटे बाद मुझे नींद आ गई। इस आधे घंटे में मेरे मन में अंजू को लेकर काफी सारा मंथन हुआ, अंजू की अहा अहा की आवाज में उसके प्रति मेरे विचार बदल लिए थे। ऐसा लग रहा था जैसे कोई पोर्न फिल्म की नायिका बेहद आनन्दपूर्वक सब कुछ भूलकर चुदाई में खोई हुई है और उसकी ऐसी तस्वीर की कल्पना करते हुए मुझे नींद आ गई।

News Reporter

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