Do Behan Ko Choda Ki Pahli Chudai- Part 1
Do Behan Ko Choda Ki Pahli Chudai- Part 1

Behan Ko Choda Pahli Chudai- Part 2

यह कहानी है 19-20 साल की एक लड़की कविता की जिसके घर में उसकी माँ माधुरी, नानी और एक भाई मोहन हैं. आय के नाम पर मधु एक प्ले वे स्कूल चलाती है. मधु तलाकशुदा है तो इसके साथ नानी और माँ को विधवा पेंशन आती है. घर का गुजारा मुश्किल से चलता है.

ऐसा नहीं कि यह परिवार शुरू से इस हालत में था, यह खाता पीता परिवार था, कविता के नाना की हरियाणा के एक गाँव में जमीन थी और वे गाँव के जाने माने वैद्य थे तो अच्छी खासी आय हो जाती थी. मधु की शादी भी एक पंजाब के अमीर घर में हुई थी. लेकिन शादी के बाद से ही ससुराल वाले उसे तंग करते थे. इसी बीच मोहन और कविता हो गए.

आखिर परेशान होकर मधु अपने पति को छोड़ कर अपने पिता के पास आ गई. तलाक का केस सालों चलता रहा, इसी बीच इस गम से मधु के पिता बीमार रहने लगे. मधु के भाइयों ने घर की जमीन बेच कर कारोबार किया और सारा पैसा कारोबार के नुकसान में चला गया, घर बैंक वालों ने नीलाम करा दिया.

मधु को तलाक के फैसले से जो पैसा मिला उससे उसने एक काम चलाऊ घर खरीदा और अपने माँ बाप को लेकर इस घर में आ गई क्योंकि मधु के भाई पहले ही अलग घर किराए पर लेकर रहने लगे थे.
ससुराल छोड़ कर आने के बाद मधु ने पढ़ाई की और किसी स्कूल में नौकरी करने लगी. किसी कारण से वो स्कूल बंद हो गया तो उसने अपना प्ले वे स्कूल खोल लिया लेकिन वो कुछ ज्यादा अच्छा नहीं चल रहा था.

कुछ समय बाद मधु के पिता की मृत्यु हो गई.
अब कविता और मोहन कॉलेज में पढ़ रहे हैं. उनके सपने ऊंचे है क्योंकि वे अपने रिश्तेदारों को देखते हैं तो उनका मन भी वैसे ही रहन सहन को करता है. और रिश्तेदार हैं कि पास नहीं फटकते.
कविता अब जवान हो रही थी उसका बदन खिलने लगा था, तो उसके दूर के एक मामा के लड़के पुलकित की नजर उस पर पड़ी. पुलकित हरियाणा में ही किसी दूसरे शहर में रहता था, एक घंटे का रास्ता था, उसने अपनी बुआ के घर आना जाना शुरू कर दिया और कुछ ही समय में उसने कविता को अपने जाल में फंसा लिया क्योंकि कविता में नादानी अभी भी बाक़ी थी.

मधु के पास साधारण सा फोन था तो कविता उस फोन से पुलकित को मिस काल करके उससे खूब बातें करती थी. कॉलेज जाने के नाम पर वे दोनों बाहर भी मिलने लगे थे. पुलकित कविता को रेस्तराँ में ले जाता, खूब खिलाता पिलाता, कविता बहुत खुश थी क्योंकि वो खाने पीने की शौकीन थी.
उधर मधु पुलकित और कविता को भाई बहन समझती थी तो उनकी नजदीकी को भाई बहन का प्यार समझ कर अनदेखा करती थी.

कॉलेज की छुट्टियों में दोनों का मिलना जब मुश्किल होता तो पुलकित अक्सर मधु के घर आ जाता था और शाम के धुंधलके में किसी बहाने दोनों स्कूटर लेकर चले जाते और सुनसान सड़क या स्थान पर जाकर खूब चूमाचाटी करते और जितना हो सकता एक दूसरे के बदन का मजा लेते थे.
रात को पुलकित घर में ही रुकता था तो देर रात में भी चुपचाप दोनों घर की छत पर या कहीं और दूसरे कमरे में जाकर सेक्स भरी हरकतें करते थे.

कविता ने बहुत बार पुलकित के लंड को अपने हाथ में पकड़ कर देखा था, एक दो बार पुलकित के कहने पर अपने मुंह में लेकर चूसा भी था. पुलकित तो हमेशा ही उसकी अमरूद की सी चूचियाँ दबाता, उसके चूतड़ सहलाता… कपड़ों के ऊपर से ही या हाथ अंदर डाल कर उसकी चूत को सहलाता. वो ये सब कुछ करते रहते थे, मगर कभी भी पुलकित का लंड कविता की चूत में नहीं गया था. पुलकित ने यह बात साफ तौर पर कविता से कही थी- जिस दिन मौका मिला चोद दूँगा तुझे!
कविता भी कहती- यार… मैं तो खुद उस दिन का इंतज़ार कर रही हूँ. पता नहीं वो दिन कब आएगा?

दोनों प्रेमी भाई बहन चुदाई के लिए तड़प रहे थे, मगर उन्हें कोई मौका नहीं मिल रहा था कि दोनों दो जिस्म एक जान हो सकें. अभी तक दोनों ने चाहे कितनी चूमाचाटी की हो या और सब कुछ किया हो लेकिन वो अभी तक चुदाई नहीं कर पाए थे क्योंकि कविता को किसी होटल वगैरा में जाकर कमरा लेकर सेक्स करने से डर लगता था.

एक बार पड़ोस में मधु के पड़ोस में से शादी का निमंत्रण आया तो कविता ने हिसाब लगाया कि उसकी मम्मी और भाई शादी में जायेंगे तो 2-3 घंटे लग जायेंगे, उसने फोन करके पुलकित को सुबह ही बुला लिया और आपस में यह तय कर लिया कि जब उसकी मम्मी और भाई शादी में जाएंगे तो उनके पास कम से कम दो घंटे का वक्त होगा क्योंकि बूढ़ी नानी तो खाना खाकर एक कमरे में जाकर सो जायेगी और उन दोनों को पूरा वक्त मिलेगा घर में ही मस्ती करने का…

रविवार का दिन था, रात को आठ बजे शादी में जाना था तो पुलकित सुबह दस बजे ही उनके पास आ गया. वो पुराने मॉडल का एक आई फोन कविता के लिए लाया और यह कह कि उसने नया फोन ले लिया है तो यह पुराना फोन कविता को दे दिया. यह काम उसने सबके सामने ही किया ताकि कोई इन दोनों पर शक ना करे.

मधु ने इस बात को भाई बहन का प्यार समझ कर सामान्य रूप से लिया और वो खुश हो गई कि वो अपनी बेटी को फोन नहीं दिला सकी थी तो अब यह अच्छा हो गया कि उसके पास भी अपना फोन हो गया.

अब रात हुई तो मधु ने सबको शादी में चलने के लिए कहा. नानी तो नहीं जा सकती थी तो उसके लिए मधु ने दो रोटी दिन की दाल सब्जी से दे दी.

अब उनके पास स्कूटर एक ही था तो सब एक साथ शादी में नहीं जा सकते थे. कविता ने मना कर दिया कि वो शादी में नहीं जाएगी, पुलकित ने भी कह दिया कि उसका जाना ठीक नहीं लगेगा.
लेकिन मधु जिद कर रही थी कि दो तीन चक्कर लगा कर सब लोग शादी में जा सकते हैं.

अब कविता और पुलकित शादी में नहीं जाते तो उनके खाने की समस्या थी तो यह हल निकाला गया कि पहले कविता और पुलकित शादी में जाकर कुछ खा पी आयें उसके बाद मोहन और मधु शादी में चले जायेंगे.
सब कुछ कविता और पुलकित के मन मुताबिक़ हो रहा था. वे दोनों आठ बजे से पहले ही स्कूटर ले कर निकल गए और पहले तो उन दोनों वे उसी तरह किसी निर्जन सड़क पर जाकर खूब चूमा चाटी की और तय कर लिया कि आज वो सब कुछ कर ही डालेंगे.
यह सब करने के बाद वो शादी में गये और फटाफट चाट टिक्की खाकर घर आ गए.

मधु और मोहन उनका ही इन्तजार कर रहे थे, उनके आते ही वे दोनों जल्दी से शादी में चले गए.
जिस लड़के की शादी थी, वो मोहन का दोस्त था तो वे शादी में से देर में ही आने वाले थे, यह बात कविता जानती थी.

अब घर में सिर्फ नानी और वे दोनों थे. नौ से ऊपर का वक्त हो गया था. नानी लेट चुकी थी, लेकिन सोई नहीं थी. उनके पास दो ही कमरे थे, एक बेडरूम और एक ड्राइंग रूम.. सब जाने बेडरूम में एक्स्ट्रा चारपाई लगा कर एक साथ सोते थे.
पुलकित के आने से आज नानी अपने आप ही ड्राइंग रूम में बिछे दीवान पर सो गई.

अब कविता बाहर का मेन गेट अच्छे से बंद करके बड़े अंदाज़ से मटकती हुई धीरे धीरे आई. सामने ही आँगन में पुलकित खड़ा था, वो उसका पास आई, उसके गले में अपनी बाहें डाल दी, पुलकित ने भी उसकी कमर में अपनी बाहें डाल दी उसे अपनी तरफ खींचा और कस कर अपने सीने से लगा लिया.

दोनों आगे बढ़े और पहली बार पूरी आज़ादी और बेफिक्री से दोनों के होंठ एक दूसरे से मिले. आँगन में खड़े दोनों बहन भाई अब प्रेमी बन चुके थे, और एक लंबे और प्रगाढ़ चुंबन में लिप्त थे.
दोनों के दिल की धड़कन तेज़ थी.

एक लंबे चुंबन के बाद जब दोनों के होंठ अलग हुये, तो कविता बोली- यार, नानी अभी जाग रही होगी… पता नहीं उठ कर आ जाए तो? एक बार देख आऊँ!
कविता ने पहले जाकर ड्राइंग रूम में देखा, अब पता नहीं नानी जाग रही थी, या सो रही थी. बस एक बार देख कर ही कविता पुलकित को अपने रूम में ले गई.

स्लेटी रंग के फूलों वाले प्रिंट की लॉन्ग फ्रॉक पहने कविता बहुत खूबसूरत और सेक्सी लग रही थी. शादी में जाने के कारण उसने लिपस्टिक, बिंदी, काजल और न जाने क्या क्या मेकअप किया हुआ था.
पुलकित तो वैसे ही बहुत गोरा चिट्टा था, तो उसे किसी मेकअप की ज़रूरत नहीं थी.

बेडरूम में जा कर कविता बेड के पास जा कर खड़ी हो गई. पुलकित ने पहले बेडरूम की कुंडी लगाई और फिर वो भी कविता के पास आ कर उसके पीछे खड़ा हो गया. पुलकित ने उसको कंधे से पकड़ कर अपनी ओर घुमाया, तो कविता खुद ही उसके सीने से लग गई.

‘ओह, मेरी प्यारी मंजरी, आज मौका मिला है मुझे तुम्हें अपनी पत्नी बनाने का!’ कह कर पुलकित ने कविता को बांहों में जकड़ कर ऊपर को उठा लिया तो कविता ने अपनी आँखें बंद कर लीं.
अभी कुछ देर पहले जिस लड़की ने खुले आँगन में अपने प्रेमी को चुम्बन दिया था, अब अपने उसी प्रेमी से शरमा रही थी क्योंकि अब वो जानती थी कि आगे क्या होने वाला है.

पुलकित ने भी बिना कोई और बात किए, कविता के लिपस्टिक लगे सुर्ख होंठों पर अपने होंठ धर दिये. जैसे ही पुलकित ने कविता का ऊपर वाला होंठ अपने होंठों में लिए, कविता ने भी पुलकित का नीचे वाला होंठ अपने होंठों में ले लिया दोनों बारी बारी से कभी ऊपर वाला तो कभी नीचे वाला होंठ चूस रहे थे, दोनों की साँसें तेज़, धड़कन भी तेज़… दोनों ज़ोर ज़ोर से एक दूसरे को अपनी बाहों में समेटने की ऐसी कोशिश कर रहे थे, जैसे एक दूसरे को खुद में समा लेना चाहते हों.

इसी चूमा चाटी में पुलकित ने कविता को पीछे को धकेल कर बेड पे लिटा दिया और खुद भी उसके ऊपर ही लेट गया. पुलकित का तना हुआ लंड कविता के पेट पर रगड़ खा रहा था.

पुलकित ने कविता के कानों के झुमके, गले की माला सब उतार दिये. एक बार फिर पुलकित झपटा कविता पर और उसके गर्दन और कंधों पर यहाँ वहाँ चूमने चाटने लगा.
कविता की भी हालत बहुत खराब हो रही थी, वो भी आँखें बंद किए बस ‘आह, आ… स्स… उफ़्फ़…’ ही बोल पा रही थी.

पुलकित ने अपने जूते उतारे, और फिर अपने कपड़े भी उतारने लगा और मन ही मन सोच रहा था कि ‘बस अब सब्र नहीं होता, पहले एक शॉट लगा लूँ, फिर सोचूँगा कि बाद में क्या करना है.’
एक ही मिनट में पुलकित नंगा हो गया. छह इंच का भूरे रंग का तीखा लंड ऊपर को मुँह उठाए हवा में झूल रहा था.

कविता भी अपनी कपड़े उतारने लगी तो पुलकित ने मना कर दिया- नहीं, मेरी दुल्हन को मैं ऐसे ही चोदूँगा!
वो बोला.
कविता वैसे ही रुक गई.

पुलकित ने पहले कविता को बेड पे बिठाया, उसके पाँव नीचे ही लटक रहे थे, फिर उसने कविता को लेटा दिया. उसका घागरा ऊपर उठाया, नीचे उसने काले रंग की चड्डी पहनी थी. उसने एक झटके में उसकी चड्डी उतार फेंकी. नीचे आज ही शेव की हुई, गोरी चूत उसके सामने नंगी हो गई.
“वाह क्या मस्त चूत है तेरी, तुझे तो चोद कर जन्नत का नज़ारा आ जाएगा!” कह कर पुलकित ने उसकी दोनों टाँगें उठाई और अपने कंधे पे रख ली, कविता को थोड़ा अपनी तरफ खींचा, और अपना लंड उसने कविता की चूत पे रख दिया.

इससे पहले के कविता इसके लिए तैयार हो पाती, पुलकित ने ज़ोर लगा कर अपना लंड कविता की चूत में ठेल दिया.
कविता दर्द से तड़पी- धीरे पुलकित, दर्द होता है!
वो बोली.
मगर पुलकित ने उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया और फिर से अपना लंड उसकी चूत में ज़ोर से पेला, कविता फिर से तड़पी, मगर वो तड़पती रही, और पुलकित ज़ोर लगाता गया, जब तक के उसका पूरा लंड कविता की चूत में नहीं घुस गया.

कविता को यह उम्मीद नहीं थी कि उसका पहला सेक्स ऐसा होगा, वो तो सोच रही थी कि पुलकित पहले उससे बहुत सारा प्यार करेगा, फिर सेक्स करेगा, मगर पुलकित ने बहुत ही ज़्यादा जल्दबाज़ी की.
पुलकित को यह भय था कि अगर कविता का भाई और मम्मी घर आ गए तो कहीं उसे यह मौका भी न गंवाना पड़े, तो पहले एक बार कविता सविता को ठोक लो, चुदाई कर लो, प्यार बाद में करते रहेंगे.
बेशक कविता की चूत भी पूरी गीली थी और पुलकित का लंड ‘पिच पिच’ की आवाज़ करता हुआ अंदर बाहर आ जा रहा था, मगर फिर भी कविता को काफी दर्द हो रहा था. उसका पहला सेक्स जो था.

पुलकित नीचे झुका और उसे कविता के ब्लाउज़ की डोरी खोलनी शुरू की और उसका ब्लाउज़ ढीला करके उतार दिया. पहले भी उसने कविता के बोबे बहुत बार दबाये थे, चूसे थे, मगर आज का मज़ा ही कुछ और था.
पुलकित ने कविता के दोनों बोबे पकड़े और खूब ज़ोर ज़ोर से दबाये, जैसे नींबू में से रस निकाल रहा था. उसकी सख्त उंगलियों के निशान कविता के बोबों पर कई जगह बन गए थे. पुलकित किसी वहशी की तरह उसे नोच रहा था. कभी उसके होंठ चबा जाता कभी उसके निप्पल.

और सिर्फ 5 मिनट की चुदाई के बाद ही पुलकित ने अपनी जवानी के रस से कविता की चूत को भर दिया.

कविता को इस सेक्स में बिल्कुल मज़ा नहीं आया. न पुलकित ने उसे प्यार किया, न प्यार से सेक्स किया. वो वैसे ही नंगी लेटी छत को देखती रही. वो सोच रही थी, ये क्या किया है पुलकित ने, ये प्यार था या हवस की पूर्ति.
और मुझे तो उसने शांत ही नहीं किया, खुद की तसल्ली की और ठण्डा पड़ गया, मैं तो प्यासी ही रह गई.

भाई ने फुफेरी बहन को चोदा लेकिन बहन को मजा नहीं आया.
आगे क्या हुआ? कहानी के अगले भाग में पढ़ें!

News Reporter

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *